मनुष्य की आकांक्षा की कविता है भक्ति कविता : प्रोफेसर अनिल राय 👉बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी 👉भक्ति काव्य ने पूरे समाज को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है: प्रो विनोद मोहन मिश्र 👉हिंदी विभाग देश के...
Alok Kumar Tiwari
1 year ago
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05 Apr 2025
मनुष्य की आकांक्षा की कविता है भक्ति कविता : प्रोफेसर अनिल राय
👉बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी
👉भक्ति काव्य ने पूरे समाज को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है: प्रो विनोद मोहन मिश्र
👉हिंदी विभाग देश के विभिन्न क्षेत्रों से साहित्य के विद्वानों के ज्ञान से अपने विद्यार्थियों को समृद्ध करने के लिए इस तरह की गोष्ठियों के आयोजन में वर्ष पर्यंत लगा रहता है : प्रो गौरव तिवारी
👉तुलसी दास पूरे समाज को एक साथ लेकर चलने की बात करते हैं : प्रो राजेश कुमार सिंह

कुशीनगर । भक्ति कविता मनुष्य की आकांक्षा की कविता है। यह आकांक्षा विभिन्न सामाजिक बंधनों और कुरीतियों से मुक्ति की है। पूरे देश में भक्ति आंदोलन लगभग एक साथ उत्पन्न हुआ। मतलब यह कि पूरा देश मुक्ति की तलाश कर रहा था। कविता वही सार्थक होती है जो सबके लिए हो। उक्त बातें दिल्ली विश्वविद्यालय के वरिष्ठ आचार्य और अंतरराष्ट्रीय संकाय के अधिष्ठाता प्रोफेसर अनिल राय ने बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय कुशीनगर के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में उदबोधन देते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सिद्धों और नाथों ने सामाजिक कुरीतियों का खूब विरोध किया। यह विरोध छनकर और मुखरित होकर भक्ति साहित्य में आया है। बौद्ध और जैन साहित्य ने हिंदू धर्म की कुरीतियों के कारण इसपर जो कुठाराघात किया था शंकराचार्य ने उन कमियों को समझते हुए अपने प्रस्थान त्रई के माध्यम से इससे मुक्त करने का प्रयास करते हुए इसका पुनरुत्थान किया। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रो राय ने कहा कि संतो का साहित्य ज्ञान की कविता है। यह कविता प्रेम से भी लबालब भरी हुई है। यह सामाजिक समरसता के भाव की भी कविता है। तुलसीदास कहते हैं कि मनुष्य को ऐसा होना चाहिए कि उसके जाने के बाद लोग उसके लिए रोएं न कि उसकी उपस्थिति रोने का कारण बने।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो विनोद मोहन मिश्र ने कहा कि भक्ति काव्य ने पूरे समाज को बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। लोग बात बात पर भक्त कवियों की कविताओं का उद्धरण देते रहते हैं।
स्वागत भाषण देते हुए प्रो गौरव तिवारी ने कहा कि हिंदी विभाग देश के विभिन्न क्षेत्रों से साहित्य के विद्वानों के ज्ञान से अपने विद्यार्थियों को समृद्ध करने के लिए इस तरह की गोष्ठियों के आयोजन में वर्ष पर्यंत लगा रहता है। उसी श्रृंखला में यह संगोष्ठी हो रही है।
आभार ज्ञापित करते हुए प्रो राजेश कुमार सिंह ने कहा कि तुलसी से बड़ा ज्ञानी और भक्त कोई नहीं हुआ। वह पूरे समाज को एक साथ लेकर चलने की बात करते हैं। सभी भक्त कवि अपने विचारों के कारण प्रासंगिक हैं।
संगोष्ठी का संचालन करते हुए कार्यक्रम संयोजक डॉ आशुतोष तिवारी ने गुरु की महत्ता बताई और उसे भक्तिकाल और आज के संदर्भ से जोड़ा। संगोष्ठी में पूर्व प्राचार्य प्रो अमृतांशु शुक्ल, प्रो रामभूषण मिश्र, डॉ राघवेंद्र मिश्र, प्रो इंद्रासन प्रसाद, प्रो बीरेंद्र कुमार, प्रो महबूब आलम, प्रो कौस्तुभ नारायण मिश्र, प्रो इंद्रजीत मिश्र, प्रो ज्ञान प्रकाश मंगलम, डॉ अंबिका प्रसाद तिवारी, डॉ निगम मौर्य, डॉ कृष्ण कुमार जायसवाल, डॉ दीपक, डॉ रामनवल प्रसाद, डॉ त्रिभुवन नाथ त्रिपाठी, डॉ अभिषेक शुक्ल, डॉ बीरज पाण्डेय, डॉ अनुज कुमार, डॉ पारस नाथ, डॉ शंभू दयाल कुशवाहा, डॉ सुबोध गौतम, डॉ पंकज दुबे, डॉ यज्ञेश नाथ त्रिपाठी, डॉ वीरेंद्र साहू, डॉ रितेश सिंह, डॉ संदीप पाण्डेय, डॉ मनीष जायसवाल, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ हिमांशु मिश्र, डॉ शशिकांत पांडेय, डॉ चंद्र प्रकाश सिंह, डॉ अवनीश तिवारी सहित महाविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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