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अत्यंत मनोहर एवं पूर्णतः वैज्ञानिक है भारतीय संस्कृति: विजयपाल नारायण त्रिपाठी

Alok Kumar Tiwari 1 year ago 121 views 14 Mar 2025
अत्यंत मनोहर एवं पूर्णतः वैज्ञानिक है भारतीय संस्कृति: विजयपाल नारायण त्रिपाठी
  अत्यंत मनोहर एवं पूर्णतः वैज्ञानिक है भारतीय संस्कृति: विजयपाल नारायण त्रिपाठी कुशीनगर । भारतीय संस्कृति अत्यंत मनोहर एवं पूर्णतः वैज्ञानिक है। इसमें त्योहारों का महत्वपूर्ण स्थान है। नाग ( नागपंचमी) से प्रारम्भ होकर फाग(होली) पर पूर्ण होता है। यह भी इसका सुखद संयोग है कि जिस दिन नाग होता है उसके आठ माह बाद ठीक उसी दिन फाग होता है। इन आठ माहों में ऋतु शीतल होती है। चूंकि अगले चार माह प्रबल ग्रीष्म का ताप होना है अस्तु ऋषि परम्परा नें उत्सव कम कर मानव को शरीर से आराम करने के लिए अन्तराल की व्यवस्था की। इन चार माह में सार्वजनिक उत्सव के स्थान पर व्यक्तिगत उत्सव यथा सामर्थ्य एवं आयु एवं आवश्यकता आधारित व्यवस्था की गई। विवाहोत्सव लग्न आदि इन चार माह के समय में निर्धारित किया। त्योहारों की इस परम्परा में नागपंचमी, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, दशहरा, दीपावली, छठ पूजा पुनः व्यक्तिगत उत्सव मकर संक्रांति, बसंत पंचमी से होते हुए होली तक आता है। होली में रंग शरीर के हो लें, शरीर मन की हो लें, प्रेयसी प्रेमी की हो लें। गुलाल गाल की हो लें, जो चाहे उसकी आखें चार हो लें, हम आपके हो लें, आप हमारे हो लें, समस्त चराचर जगत चैतन्य हो ले। होली की परम्परा में रसिक होली ब्रज की है। जब हम गातें हैं " आज बिरज में होली है रसिया "। अवध की होली मर्यादित है। " होली खेलैं, रघुवीरा " इसी का उदाहरण है। काशी की होली जीवन के नश्वरता को प्रकाशित करती है " होली खेलैं मसाने में "। जीवन के सृजन, पोषण एवं संहार तीनों स्थितियों में मनाया जाने वाला पर्व है। ठीक पृथ्वी के घूर्णन के आधार पर पश्चिम से प्रारम्भ (मथुरा से काशी) पूरब की ओर है। यह पुरुषार्थ चतुष्टय को भी पूरित करता है। धार्मिक है,दैविक है, आध्यात्मिक है, भौतिक है। होलिका दहन में प्रहलाद का बचना होलिका का ज्वलन झूठ के आवरण को हटाकर सत्य के बचे रहने का प्रतीक है। इस संवत की होली आप के जीवन के नैराश्य को जलाकर उत्साह के प्रहलाद को आगे लाने की हो। ऐसी ही शुभकांक्षाओ के साथ बैगनी, नीला🔵, ☁आसमानी, हरा💚, पीला💛, नारंगी🍊, लाल🔴 रंग से निर्मित इंद्रधनुष🌈 इस बात का प्रतीक हो कि आप के जीवन में सदैव खुशियों की बारिश💦 हो। विजयपाल नारायण त्रिपाठी, खण्ड शिक्षा अधिकारी कसया/फाजिलनगर, जनपद- कुशीनगर।

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