स्तूप को क्षतिग्रस्त कर सकते है शीर्ष पर उगे पीपल के पौधे 👉 कभी पीपल (बोधिवृक्ष) के नीचे सिद्धार्थ को हुई थी ज्ञान प्राप्ति, आज उनके स्तूप के लिए बने खतरा
Alok Kumar Tiwari
10 months ago
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30 Sep 2025
स्तूप को क्षतिग्रस्त कर सकते है शीर्ष पर उगे पीपल के पौधे
👉 कभी पीपल (बोधिवृक्ष) के नीचे सिद्धार्थ को हुई थी ज्ञान प्राप्ति, आज उनके स्तूप के लिए बने खतरा
कुशीनगर । अंतरराष्ट्रीय पर्यटक केंद्र कुशीनगर स्थित महापरिनिर्वाण स्तूप में भगवान बुद्ध के धातु अवशेष का एक भाग मूल रूप से सुरक्षित है। इसके शीर्ष पर कई पीपल के पौधे उग आए हैं। जो स्तूप के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। लगभग तीन वर्ष पहले भी स्तूप के शीर्ष पर पीपल के पौधे उग आए थे और उनकी जड़ें स्तूप के अंदर काफी नीचे तक चली गई थीं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भापुस) द्वारा काफी मशक्कत के बाद जड़ें निकालकर स्तूप को सुरक्षित किया गया था। इसमें भापुस को काफी श्रम करना पड़ा था और धन भी व्यय करना पड़ा था। यदि जड़ों को शीघ्र निकाला नहीं गया तो यह स्तूप के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
लगभग ढ़ाई हजार वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध का इसी स्थान पर परिनिर्वाण हुआ था। उनका अंतिम संस्कार रामाभार में हिरण्यवती नदी के तट पर किया गया। उनके अस्थि अवशेष को आठ भाग कर द्रोण ने तत्कालीन गणराज्यों को वितरित किया था। बुद्ध के अस्थि अवशेष का एक भाग परिनिर्वाण स्तूप में मूल रूप में सुरक्षित रखा गया जो आज भी सुरक्षित है। मूल स्तूप पांचवीं शताब्दी में हरिबल द्वारा बनवाया गया था। यह विश्व भर के बौद्ध अनुयायियों के लिए वंदनीय व पूजनीय है। इसकी सुरक्षा आवश्यक है।
निर्वाण स्तूप के शीर्ष पर उगे पौधों को बरसात बंद होते ही निकाला जाएगा और इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए केमिकल ट्रीटमेंट भी होगा।
शादाब खान,
संरक्षण सहायक,
भापुस, उपमंडल,
कुशीनगर
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