पाली को शास्त्रीय भाषा की दर्जा मिलने से बौद्ध भिक्षुओं में हर्ष
Alok Kumar Tiwari
1 year ago
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18 Oct 2024
कुशीनगर । पॉली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने पर बौद्ध भिक्षुओं ने प्रसन्नता प्रकट करते हुए केंद्र सरकार को बधाई दी। विदित हो कि केंद्र सरकार ने बीते तीन अक्टूबर को पॉली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया है।
कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर ने भारत सरकार के इस निर्णय की सराहना किया है। कहा कि इस भाषा में निहित नैतिक मूल्यों के अध्ययन अध्यापन और अनुशीलन से समाज में नैतिकतापूर्ण वातावरण का विकास होगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भी है।
पॉली सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव भिक्षु डॉ नन्दरतन ने कहा कि यह प्राचीन भारत की अमूल्य धरोहर है। जो भगवान बुद्ध की लोक कल्याणकारी वाणी का संरक्षण व पालन करती है। पॉली को शास्त्रीय भाषा की दर्जा मिलने से भविष्य में इसका समुचित संरक्षण हो सकेगा। इससे पॉली एवं बौद्ध अध्ययन के विद्यार्थियों व शोधार्थियों को भी रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भिक्षु चंदिमा ने कहा कि पॉली भाषा के प्रचार प्रसार से न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने में सहायता मिलेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाली संस्कृति व बौद्ध देशों से प्रगाढ़ सांस्कृतिक मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किये जा सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भन्ते महेंद्र ने सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि सरकार के इस ऐतिहासिक व अकादमिक कार्य से पॉली भाषा का पूरे विश्व में प्रचार प्रसार होगा।
कुशीनगर भिक्षु संघ के अध्यक्ष एबी ज्ञानेश्वर ने भारत सरकार के इस निर्णय की सराहना किया है। कहा कि इस भाषा में निहित नैतिक मूल्यों के अध्ययन अध्यापन और अनुशीलन से समाज में नैतिकतापूर्ण वातावरण का विकास होगा, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भी है।
पॉली सोसायटी ऑफ इंडिया के सचिव भिक्षु डॉ नन्दरतन ने कहा कि यह प्राचीन भारत की अमूल्य धरोहर है। जो भगवान बुद्ध की लोक कल्याणकारी वाणी का संरक्षण व पालन करती है। पॉली को शास्त्रीय भाषा की दर्जा मिलने से भविष्य में इसका समुचित संरक्षण हो सकेगा। इससे पॉली एवं बौद्ध अध्ययन के विद्यार्थियों व शोधार्थियों को भी रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भिक्षु चंदिमा ने कहा कि पॉली भाषा के प्रचार प्रसार से न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने में सहायता मिलेगी बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाली संस्कृति व बौद्ध देशों से प्रगाढ़ सांस्कृतिक मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित किये जा सकेंगे।
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के पूर्व अध्यक्ष भन्ते महेंद्र ने सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा कि सरकार के इस ऐतिहासिक व अकादमिक कार्य से पॉली भाषा का पूरे विश्व में प्रचार प्रसार होगा।
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